क्या है होमोफोबिया ? सेक्शन 377 के बारे में ये जरूर जाने

अलीग़ढ मूवी में प्रफेसर सिराज का पत्र निभाते हुए एक्टर मनोज बाजपय ने कहा था , कोई मेरी पूरी आइडेंटिटी को मात्रा तीन अक्सरो में यानि G A Y में   कैसे समेट  सकता है? किसी की पूरी पेहचानको मात्र उनके सेक्स पार्टनर ने चुनाव पर समेट देना होमोफोबिआ का पहला कदम है। 



क्या है होमोफोबिया ?

गालिया देना ,माझाक उड़ाना ,चुटकुले बनाना ,सभ्य कहलाने वाले समाज से निष्कासित कर देना उससे दोस्ती न करना खुद से अलग करवाने का कोई मौका न छोड़ना होमोफोबिया है। 
  और गुनाह की श्रेणी में रख दे तो तो फिर  जेल  में डालना ,पीटना ,हत्या करदेना ,गुप्तांग कटलेना होमोफोबिया  का नतीजा है। 
 वही होमोफोबिया जिसे आयुष्मान खुराना अपनी फिल्म सुभ्मंगल जयदा सावधान में ला इलाज बीमारी बता रहे है। 

HOMO  का  मतलब होता हे अपने ही जैसे एक ही सेक्स जैसे पार्नेर से लगाव होना उसे होमो कहा जाता है क्यों की होमोसेक्सुअल होना जाहिर करना हमारे देश में आम नहीं है। इस लिए इससे घभराना और डरना आम बात है।  घभराहट का जस्टिफिकेसन नहीं हो सकता 

कुछ दलीले जो होमोफोबिअ के बारेमे दी जाती है 

जैसे वो अप्राकृतिक है ,उससे संतान नहीं होती। ये धर्म के खिलाफ है।  ये बीमारी है।  या इससे hiv होती है। इस तरह की बाटे कहना होमोफोबिया है 
  होमोफोबिया सेक्सिज़म जितना आप है जैसे की  हम लड़कियों को लड़को से कमजोर समझने से पहले जरा भी नहीं सोचते वैसे ही होमोसेक्सुअल के बारे में बारे में गन्दी बात करने में जरा भी नहीं सोच ते
 अगर कोई व्यक्ति गे है तो वो सभी लड़को पर दोरे डालेगा , तरीके से छुएगा उनके बचो के लिए खतरा है यहातक की वो वासियावृत्ति करता होगा नासा करता होगा और वो आसवस्त होगा ऐसा लोग खुद ही मान लेते है।  लड़की के लिए भी ऐसे ही अगर लड़की लेस्बियन है तो उनके घरसे सरे सेक्स टॉयज निकलेंगे। उससे अपनी लड़की को दूर करदिया जाये वगेरे वगेरे

हमारे देश में तो ये भी मानना है अगर कोई लड़के को  लड़की नहीं मिल रही है या फ़ी कोई लड़की को कोई लड़का नहीं मिल रहा है तो वो होमोसेक्सुअल है। 


सिनेमा जगत की सोच 

दोस्ताना ,बोलबचन पार्टनर जैसे फिल्म में गे किरदार फूहड़ ,मुर्ख जैसी दूसरी पहचान से दूर ही है। वो लोग ये नहीं सोच ते क्या  फिल्मे वो लोग भी देखते है जो होमोसेक्सुअल है उनपे इसका असर कैसा पड़ेगा।  जिसकी वजह से ये लोग और भी ज्यादा दब जाते है। 

एक समाज के तोर पर हम एक लड़के और एक लड़की को एक दूजे से अलग रखने की कोसिसि करते है। 
स्कूल  अलग रोव में बैठा ते है। अलग अलग होस्टल्स बनाये जाते है। बेटी यो को सभी लड़को को भैया कहलवाना अपनी जिम्मेदारी समज ते है। लेकिन वो जो वे एक दूसरे से कर सकते है यानि सेक्स वो तो वे एक दूजे से भी कर सकते है ,
 प्रॉब्लम सिर्फ प्यार से है और प्रेम में किये गए सेक्स से है। सहमति से किये गए सेक्स से है। रेप से नहीं है रेप तो हमें प्राकृतिक लगता है। 

होमोसेक्सुअल को अप्राकृतिक कहने में ही ये अस्यूम कर लिया जता है की सेक्स का मतलब सिर्फ बच्चे पैदा करना होता है। 


हमें अब ये देखना  है की हमारा देश होमोसेक्सुअलिटी के सोच से कब आजाद होता है। 

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